बारिश में भी नहीं थमा 'चिता आंदोलन', चौथे दिन अमित भटनागर आमरण अनशन पर
छतरपुर/पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी समेत विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित ग्रामीणों का 'चिता आंदोलन' सोमवार को चौथे दिन भी जारी रहा। लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष और ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और कथित भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक वास्तविक प्रभावितों को न्याय नहीं मिलेगा और आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीन और गांव छीन लिए गए हैं। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालयों में समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें परेशान किया जाता है तथा कुछ मामलों में रिश्वत की मांग भी की जाती है।
बारिश के बीच भी आंदोलनकारियों का हौसला कायम रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि विस्थापित परिवारों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, परियोजनाओं से जुड़े मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप आंदोलनकारियों के दावों और बयानों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।