यही वह भवन है, जहां जनपद अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय संचालित होते हैं। यदि जिला मुख्यालय का यह सरकारी भवन ही बारिश में सुरक्षित नहीं रह पा रहा है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के अंतर्गत कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायतों में कराए गए कई निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में जनपद पंचायत भवन की यह स्थिति पूरे पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
"जब जनपद पंचायत का अपना भवन ही बारिश में टपकने लगे, तो गांवों में करोड़ों रुपये से बने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब जरूरत है पूरे मामले की तकनीकी जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की।"
छतरपुर जनपद पंचायत भवन की बदहाली ने खोली निर्माण कार्यों की पोल
छतरपुर। मामूली बारिश ने ही जनपद पंचायत छतरपुर भवन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भवन की छत से पानी टपकने के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं, जबकि परिसर में जगह-जगह पानी जमा है। दीवारों पर सीलन और छत पर रिसाव के निशान भी नजर आ रहे हैं
