जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में विस्थापित आदिवासी परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक वास्तविक विस्थापितों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अमित भटनागर का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी
आंदोलन को धार देने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका अनशन आज तीसरे दिन भी जारी रहा। वहीं ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर मिट्टी सत्याग्रह और जल सत्याग्रह भी शुरू कर दिया है।
पेयजल संकट से जूझ रहे आंदोलनकारी, दूषित पानी पीने का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा पेयजल बंद कर दिया गया है, जिसके कारण आदिवासी महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने इससे स्वास्थ्य बिगड़ने की बात कही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने से बढ़ा तनाव
आंदोलन स्थल पर बिजावर तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनातनी की स्थिति बनी रही।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं उन्होंने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
अमित भटनागर ने कहा- अधिकार मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापितों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
सभी विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।
परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
विस्थापित परिवारों पर प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न रोका जाए।
फिलहाल आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों का आक्रोश बरकरार है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच समाधान की स्थिति नहीं बन पाने से मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।
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संपादक: एन. एल. चौधरी